पिछले एक दशक (2014-2024) में, भारत के राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली (NARS), जिसमें ICAR संस्थान और राज्य/केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (CAU/SAU) शामिल हैं, ने 2,900 उन्नत खेत फसल प्रजातियाँ और संकर (हाइब्रिड) विकसित किए हैं। इनमें अनाज (1,380), तिलहन (412), दलहन (437), रेशा फसलें (376), चारा फसलें (178), गन्ना (88), और अन्य फसलें (29) शामिल हैं। खास बात यह है कि इनमें से 2,661 प्रजातियाँ कीटों, बीमारियों और चरम मौसम की स्थिति को झेलने के लिए बनाई गई हैं, जो जलवायु अनिश्चितताओं का सामना कर रहे किसानों के लिए बेहद फायदेमंद हैं।

इसके अलावा, 537 प्रजातियाँ विशेष रूप से अत्यधिक जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए उन्नत परिशुद्धता फेनोटाइपिंग उपकरणों का उपयोग करके विकसित की गई हैं। किसानों के लिए 152 बायोफोर्टिफाइड (पोषण से भरपूर) प्रजातियाँ भी उपलब्ध हैं, जैसे चावल, गेहूं, मक्का, बाजरा, तिलहन, दलहन और अनाज अमरंथ, जो बेहतर पोषण प्रदान करती हैं।

बागवानी फसलों को भी नजरअंदाज नहीं किया गया है। 819 नई प्रजातियाँ पेश की गई हैं, जिनमें मसाले, कंद, फल, सब्जियाँ, फूल और औषधीय पौधे शामिल हैं। इन प्रजातियों का लक्ष्य किसानों की उत्पादकता और मुनाफे को बढ़ाना है।

इन उन्नत बीजों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए, रबी 2024-25 और खरीफ 2025 मौसम के लिए ब्रीडर बीज उत्पादन की योजना बनाई गई है। ICAR और अन्य संस्थान राष्ट्रीय बीज निगम, राज्य बीज निगमों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के साथ मिलकर बीजों को तेजी से बढ़ाने और किसानों तक पहुँचाने में जुटे हैं। इसके अलावा, किसानों की भागीदारी वाला बीज उत्पादन कार्यक्रम किसानों को बीज उत्पादन प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करके तेजी से वृद्धि में मदद कर रहा है।

किसानों में जागरूकता फैलाने के प्रयासों में कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) द्वारा अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन और दूरदर्शन, ऑल इंडिया रेडियो तथा डिजिटल प्लेटफार्मों के जरिए अभियान शामिल हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और पोषण मिशन के तहत सीड विलेज कार्यक्रम के जरिए किसानों को उच्च उपज देने वाले, जलवायु-सहिष्णु और बायोफोर्टिफाइड बीज सब्सिडी पर मिल रहे हैं — अनाज के लिए 50% और तिलहन, चारा और हरी खाद फसलों के लिए 60%