छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के दूरस्थ अंचल के किसान अपने खेतों में विभिन्न उद्यानिकी फसलों की खेती करते हैं। जिसमें सामान्य खेती के साथ-साथ चाय, काजू, मिर्च, टमाटर, आलू और नाशपाती की अच्छी उत्पादन कर रहें हैं। बगीचा विकास खंड क्षेत्र के पठारी क्षेत्रों में व्यापक पैमाने पर नाशपाती की पैदावार हो रही है और किसानों को इससे अच्छा मुनाफा भी मिल रहा है। जिससे उनका जीवन स्तर ऊंचा उठ रहा है और वे आत्मनिर्भर बन रहे है।

जशपुर जिले में वर्ष 2005-06 से केन्द्र प्रवर्तित राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना घटक फल क्षेत्र विस्तार के तहत रोपण कार्य उद्यान विभाग द्वारा कराया जा रहा है। जिले में नाशपाती का रकबा 790 हे. में लगभग 1700 कृषकों द्वारा उत्पादन कार्य लिया जा रहा है। जिसमें 1230 मी. टन का उत्पादन हो रहा है। योजना के अंतर्गत नाशपाती रोपण हेतु प्रावधानित राशि 38000 हे. लागत का 19000 हे. तीन वर्ष रखरखाव सहित 60:20:20 के अनुपात में अनुदान दिया जाता है।

प्राप्त जानकारी अनुसार जशपुर के बगीचा विकासखंड के पठारी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नाशपाती की खेती भी की जा रही है। जिले में 750 हेक्टेयर में 660 मीट्रिक टन नाशपाती का उत्पादन हो रहा है। जिससे 17 सौ से भी अधिक किसान लाभान्वित हो रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की नाशपाती का स्वाद देश की राजधानी दिल्ली को पसंद आ रहा है। दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश और झारखंड समेत देश के विभिन्न राज्यों में यहां की नाशपाती खरीदी जा रही है. अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आदिवासी संस्कृति के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध जशपुर के दूरस्थ अंचलों के किसान अपने खेतों में साग-सब्जी के अलावा नई पद्धति से चाय, काजू, टमाटर, मिर्च और आलू की भी अच्छी खेती कर रहे हैं। यहां के बगीचा विकासखंड के पठारी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नाशपाती की खेती भी की जा रही है।