चीन ने पिछले दो महीनों से भारत को स्पेशियलिटी उर्वरकों का निर्यात पूरी तरह रोक दिया है, जिससे भारतीय आयातकों और किसानों के बीच गहरी चिंता पैदा हो गई है। ये उर्वरक फलों, सब्जियों और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों की उपज बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं।

हालांकि चीन इन उर्वरकों का निर्यात अन्य देशों को कर रहा है, लेकिन भारत के लिए भेजे गए खेपों की जांच और क्लीयरेंस को रोक दिया गया है। उद्योग सूत्रों के अनुसार, चीन की ओर से कोई आधिकारिक निर्यात प्रतिबंध नहीं है, लेकिन प्रक्रियाओं का उपयोग कर आपूर्ति को रोका या टाला जा रहा है।

चार-पांच वर्षों से धीरे-धीरे सख्ती
सॉल्युबल फर्टिलाइज़र इंडस्ट्री एसोसिएशन (SFIA) के अध्यक्ष रजीब चक्रवर्ती ने बताया, “चीन पिछले चार-पांच वर्षों से भारत को स्पेशियलिटी उर्वरकों के निर्यात पर धीरे-धीरे सख्ती कर रहा था। लेकिन अब यह पूरी तरह से बंद हो गया है।”

भारत अपनी लगभग 80% स्पेशियलिटी उर्वरकों की ज़रूरत चीन से पूरी करता है। इनमें जल घुलनशील उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व (माइक्रोन्यूट्रिएंट), नैनो और जैविक उर्वरक, नियंत्रित और धीमे प्रभाव वाले उर्वरक, और बायोस्टिमुलेंट्स शामिल हैं। ये उत्पाद परंपरागत उर्वरकों की तरह सब्सिडी वाले नहीं होते, लेकिन मिट्टी की सेहत सुधारने, उपज बढ़ाने और पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के लिए बेहद जरूरी हैं।

घरेलू उत्पादन अब बन रहा विकल्प
जून से दिसंबर के बीच भारत 1.5 से 1.6 लाख टन तक ऐसे उर्वरकों का आयात करता है। अब तक घरेलू उत्पादन कम था क्योंकि मांग कम थी, लेकिन जैसे-जैसे इनका प्रयोग पारंपरिक उर्वरकों की जगह बढ़ रहा है, कई भारतीय कंपनियां स्थानीय निर्माण इकाइयाँ लगाने में रुचि दिखा रही हैं।

तेजी से बढ़ रहा बाजार
फर्टिलाइज़र एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) के अनुसार, भारत में माइक्रोन्यूट्रिएंट उर्वरकों का बाजार 2029 तक 1 अरब डॉलर के पार जा सकता है, जिसकी वार्षिक वृद्धि दर 9.2% रहने की उम्मीद है। वहीं, बायोस्टिमुलेंट्स का बाजार 15.6% की दर से बढ़ते हुए 2029 तक 734 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। जैविक उर्वरकों का बाजार 2032 तक 1.13 अरब डॉलर को पार कर सकता है।

वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता की तलाश जरूरी
डीपक फर्टिलाइजर्स, पारादीप फॉस्फेट्स और नागार्जुन फर्टिलाइजर्स जैसी प्रमुख कंपनियां पहले से इस क्षेत्र में सक्रिय हैं, लेकिन चीन से अचानक आपूर्ति रुकने से अनिश्चितता बढ़ गई है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को जॉर्डन और यूरोप जैसे नए स्रोतों से आपूर्ति की संभावनाएं तलाशनी होंगी, हालांकि समय पर डिलीवरी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

स्मार्ट कृषि के लिए जरूरी
गौरतलब है कि पारंपरिक यूरिया, डीएपी और एमओपी जैसे उर्वरकों की तुलना में स्पेशियलिटी उर्वरक विशेष फसलों के लिए लक्षित पोषण प्रदान करते हैं और टिकाऊ खेती के लिए अनिवार्य माने जाते हैं।

भारत-चीन तनाव का असर
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और पाकिस्तान के साथ चीन के रिश्तों के चलते व्यापार संबंधों पर पिछले पांच वर्षों में असर पड़ा है। भारत ने सीमावर्ती देशों से निवेश के लिए सरकारी अनुमति अनिवार्य कर दी है, जो मुख्य रूप से चीन को ध्यान में रखकर लागू की गई थी।

निष्कर्ष
चीन से सप्लाई ठप होने के बीच भारत के सामने चुनौती है कि वह वैकल्पिक स्रोतों की व्यवस्था करे और साथ ही घरेलू उत्पादन को तेजी से बढ़ाए, ताकि किसानों को जरूरी पोषण सामग्री समय पर उपलब्ध हो सके।