पब्लिक एक्शन कमेटी (PAC) ने पंजाब में बार-बार आने वाली बाढ़ों को “मानवजनित आपदा” करार देते हुए सोमवार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) का दरवाज़ा खटखटाया है। PAC ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) और राज्य सरकार पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है।
PAC के सदस्यों कुलदीप सिंह खैरा, इंजीनियर कपिल अरोड़ा, जसकीरत सिंह और डॉ. अमनदीप सिंह बैंस ने लुधियाना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि अवैज्ञानिक ढंग से बांधों का संचालन और पंजाब सरकार की ग़ैरक़ानूनी खनन व अतिक्रमण रोकने में विफलता ने बाढ़ की स्थिति को और बिगाड़ा।
सदस्यों ने आरोप लगाया कि इस वर्ष BBMB ने समय से पहले ही बांधों से पानी छोड़ा, जबकि जलाशयों का स्तर अभी अधिकतम सुरक्षित सीमा तक नहीं पहुंचा था। जसकीरत सिंह ने कहा, “यह प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि मानवीय भूल थी।”
PAC ने याद दिलाया कि 2014 की केंद्रीय जल आयोग (CWC) की रिपोर्ट में BBMB को फ्लड रिव्यू लेवल (FRL) की समीक्षा करने की सलाह दी गई थी, लेकिन बोर्ड अब भी 1990 के मानकों पर ही अटका हुआ है।
PAC ने यह भी आरोप लगाया कि 2023 में भी उन्होंने BBMB की लापरवाहियों की ओर ध्यान दिलाया था और जांच की मांग की थी, लेकिन इसके बावजूद बोर्ड ने अपनी कार्यशैली नहीं बदली।
जसकीरत सिंह ने दावा किया कि बांध संचालन से जुड़े आंकड़े BBMB की वेबसाइट से हटा दिए गए, जिससे पारदर्शिता पर भी सवाल उठता है।



