भारत के सरकारी गोदामों में चावल का भंडार सितंबर की शुरुआत तक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जबकि गेहूं का भंडार भी चार साल के उच्चतम स्तर पर दर्ज किया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर तक चावल का स्टॉक पिछले वर्ष की तुलना में 14% से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
यह रिकॉर्ड चावल भंडार दुनिया के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता भारत को अधिक निर्यात करने में मदद करेगा। वहीं, पर्याप्त गेहूं भंडार से सरकार को आने वाले महीनों में खुले बाजार में बिक्री करके कीमतों को नियंत्रित करने का अवसर मिलेगा।
आंकड़ों के मुताबिक, 1 सितंबर तक सरकारी गोदामों में चावल (जिसमें बिना कुटाई का धान भी शामिल है) का भंडार 4.82 करोड़ मीट्रिक टन था, जो सरकार के 1 जुलाई के लक्ष्य 1.35 करोड़ टन से कई गुना अधिक है।
इसी तरह, 1 सितंबर को गेहूं का भंडार 3.33 करोड़ टन दर्ज किया गया, जो सरकार के लक्ष्य 2.76 करोड़ टन से काफी ऊपर है।
नई दिल्ली स्थित एक वैश्विक व्यापार कंपनी के डीलर ने कहा, “भारत इस साल रिकॉर्ड मात्रा में चावल का निर्यात करने जा रहा है, लेकिन पिछले साल की रिकॉर्ड फसल के कारण स्टॉक अभी भी ऊंचा बना हुआ है।”
भारत, जो वैश्विक चावल निर्यात का करीब 40% हिस्सा रखता है, ने मार्च 2025 में चावल पर लगी सभी निर्यात पाबंदियां हटा दी थीं। राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के मुताबिक, भारत से इस साल चावल के शिपमेंट लगभग 25% बढ़कर रिकॉर्ड 2.25 करोड़ टन तक पहुंच सकते हैं।
डीलरों ने कहा कि नए सीजन की धान फसल अगले महीने आने लगेगी, जिससे सरकारी एजेंसियों के लिए भंडारण की चुनौती खड़ी हो सकती है।
पिछले तीन वर्षों में कम गेहूं भंडार सरकार के लिए चिंता का विषय बना हुआ था, लेकिन अब पर्याप्त आपूर्ति के चलते त्योहारों के मौसम में मांग बढ़ने पर सरकार खुले बाजार में गेहूं छोड़कर कीमतों को नियंत्रित कर सकती है।
महाराष्ट्र के एक व्यापारी ने कहा, “दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान गेहूं की मांग बढ़ जाती है। इस बार सरकार के पास पर्याप्त स्टॉक है, जिससे बाजार में स्थिरता बनी रहेगी।”



