अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50% तक का भारी टैरिफ लगाने के बाद भारत सरकार सक्रिय रूप से नए निर्यात बाज़ार तलाश रही है ताकि किसानों को किसी भी संभावित नुकसान से बचाया जा सके।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डी.के. यादव ने सोमवार को कहा कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए वैकल्पिक देशों में निर्यात अवसर तलाश रही है और आयात पर भी आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम उठा रही है।
उन्होंने बताया कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के बाद मंत्रालय स्तर पर विभिन्न वस्तुओं के लिए नए निर्यात गंतव्य खोजने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके साथ ही, जैव संशोधित सोयाबीन, मक्का, दूध और दुग्ध उत्पादों के आयात को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट है और अन्य देशों से विकल्प खोजे जा रहे हैं।
यादव ने कहा, “हम यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि हमारी आयातित वस्तुएँ कौन-कौन सी हैं और उन्हें घरेलू स्तर पर कैसे पूरा किया जाए। प्रधानमंत्री और मंत्री स्तर पर लगातार यह चर्चा हो रही है कि किसानों को उचित दाम मिले और वे किसी भी स्थिति में नुकसान न झेलें।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले दो-तीन महीनों से आत्मनिर्भरता हासिल करने और आयात निर्भरता कम करने पर केंद्रित कार्यक्रम चल रहे हैं।
यह बयान ‘Dialogue Next’ कार्यक्रम के दौरान आया, जिसे पहली बार भारत में अमेरिकी संस्था वर्ल्ड फ़ूड प्राइज़ फ़ाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया। इस अवसर पर CIMMYT के महानिदेशक ब्रैम गोवार्ट्स, बोर्लॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया (BISA) के प्रबंध निदेशक बी.एम. प्रसन्ना और वर्ल्ड फ़ूड प्राइज़ फ़ाउंडेशन की वरिष्ठ निदेशक (रणनीतिक संचार) निकोल बैरेका प्रेंगर भी मौजूद रहे।
सरकार का कहना है कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और किसी भी तरह का नुकसान उन्हें नहीं उठाना पड़ेगा।



