देशभर में किसान अब पारंपरिक खेती से हटकर बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं। इनमें ड्रैगन फ्रूट (कमलम/पिताया) की खेती सबसे तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसे ‘खेत का सोना’ कहा जा रहा है क्योंकि एक बार रोपण के बाद यह 20-25 साल तक हर साल कई बार फल देता है और किसानों को डबल फायदा पहुंचाता है।
ड्रैगन फ्रूट अपने आकर्षक रंग, पोषण गुण और बाजार में बढ़ती मांग के कारण फायदेमंद साबित हो रहा है। वर्तमान में यह ₹200 से ₹400 प्रति किलो तक बिक रहा है। किसान प्रति एकड़ सालाना 10-15 टन उत्पादन लेकर ₹3 से ₹8 लाख तक का शुद्ध लाभ कमा सकते हैं। कुछ प्रगतिशील किसान तो प्रति एकड़ ₹7 लाख से अधिक कमा रहे हैं।
खेती की खासियतें
•यह फल विटामिन C, कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिंक से भरपूर है।
•दिल, डायबिटीज़ और गठिया जैसी बीमारियों की रोकथाम में सहायक है।
•एक पौधे से 1-2 साल में फल मिलना शुरू हो जाता है।
•एक बार पौधा लगाने के बाद 20-25 साल तक फल देता है।
सरकारी सहायता
भारत सरकार ‘मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH)’ योजना के तहत ड्रैगन फ्रूट को बढ़ावा दे रही है। कई राज्य सरकारें भी किसानों को आर्थिक मदद दे रही हैं।
•बिहार: 40% सब्सिडी
•उत्तर प्रदेश: ₹2.5 लाख तक सहायता
•गुजरात: प्रति हेक्टेयर ₹3 लाख की मदद
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ड्रैगन फ्रूट की खेती किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
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