देश के 10 प्रमुख कृषि वैज्ञानिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) सरसों की मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने और उस पर लगी रोक हटाने की मांग की है। इन वैज्ञानिकों में तीन पद्म भूषण और दो पद्म श्री पुरस्कार विजेता शामिल हैं।
वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है कि अक्टूबर 2022 में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) द्वारा GM सरसों की पर्यावरणीय स्वीकृति दिए जाने के बावजूद, पिछले दो वर्षों में किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है। उनका कहना है कि यदि अक्टूबर 2025 की बुआई का समय भी निकल गया तो एक और अहम सीजन डेटा संग्रह, हाइब्रिड विकास और वाणिज्यिक उपयोग के लिए बर्बाद हो जाएगा।
पृष्ठभूमि: अनुमति और अदालत की रोक
25 अक्टूबर 2022 को MoEF&CC ने पहली बार GM सरसों (DMH-11 हाइब्रिड सहित) के पर्यावरणीय विमोचन को मंजूरी दी थी, जिसके बाद ICAR के नेतृत्व में फसल परीक्षण और परागण अध्ययनों का कार्यक्रम तय किया गया था।
लेकिन 3 नवंबर 2022 को एक लोकहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने मौखिक आदेश से इन परीक्षणों पर रोक लगा दी। अगस्त 2024 में अदालत ने इस मामले में स्प्लिट वर्डिक्ट दिया – एक न्यायाधीश ने वैज्ञानिक आधार पर GM सरसों के पक्ष में फैसला दिया जबकि दूसरे ने इसे रद्द कर दिया। इस कारण रोक अभी भी जारी है।
वैज्ञानिकों की दलीलें
वैज्ञानिकों ने कहा कि भारत कृषि जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दुनिया में अग्रणी है। ICAR द्वारा दो जीनोम-एडिटेड चावल किस्मों को जारी किया जाना इसकी मिसाल है। फिर भी GM सरसों पर प्रगति ठप है।
उन्होंने यह भी बताया कि GM सरसों में इस्तेमाल किए गए जीन कनाडा, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में रेपसीड हाइब्रिड्स में दशकों से बिना किसी दुष्प्रभाव के उपयोग हो रहे हैं। भारत में भी सभी बायोसेफ्टी परीक्षण पूरे किए गए हैं और इनमें कोई नकारात्मक असर नहीं पाया गया।
वैज्ञानिकों ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि कानूनी टीम और संबंधित मंत्रालयों के बीच समन्वय कर यह सुनिश्चित किया जाए कि MoEF&CC का निर्णय लागू हो। उन्होंने कहा कि GM फसलों के लिए नीति ढांचा पहले से मौजूद है और इसे लागू करना सरसों की उत्पादकता बढ़ाने और देश को खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाने के लिए आवश्यक है।
पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख वैज्ञानिक
•डॉ. आर.एस. परोडा, पूर्व महानिदेशक, ICAR एवं अध्यक्ष, ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (TAAS)
•डॉ. जी. पद्मनाभन, पूर्व निदेशक, IISc बेंगलुरु
•प्रो. आर.बी. सिंह, पूर्व निदेशक, IARI और पूर्व ADG, FAO एशिया-प्रशांत
•डॉ. बी.एस. ढिल्लों, पूर्व कुलपति, PAU लुधियाना
•डॉ. सी.डी. मायee, पूर्व अध्यक्ष, ASRB
•डॉ. सुधीर सोपोरी, पूर्व कुलपति, JNU
•डॉ. एन.के. सिंह, नेशनल प्रोफेसर, बी.पी. पाल चेयर इन जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग
•डॉ. अशोक के. सिंह, पूर्व निदेशक, ICAR-IARI, नई दिल्ली
•डॉ. अनुपम वर्मा, पूर्व अध्यक्ष, वर्ल्ड सोसायटी फॉर वायरोलॉजी एवं पूर्व ICAR नेशनल प्रोफेसर
•डॉ. जे.एल. करिहालू, पूर्व निदेशक, ICAR-NBPGR, नई दिल्ली
इन वैज्ञानिकों ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि किसानों के हित और देश की खाद्य तेल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए GM सरसों के व्यावसायिक उपयोग में तेजी लाने के लिए त्वरित कदम उठाए जाएं।



