इस खरीफ सीजन में छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए राहत की खबर है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर प्रदेश में सहकारी और निजी क्षेत्रों के माध्यम से रासायनिक उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। साथ ही, किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जो कि कम लागत, पर्यावरण-अनुकूल और फसल उत्पादन में उतने ही प्रभावी साबित हो रहे हैं।
खरीफ 2025 के लिए भारत सरकार ने प्रदेश को 14.62 लाख मीट्रिक टन (LMT) रासायनिक खाद आवंटित किया था। इस लक्ष्य के मुकाबले राज्य ने पहले ही 15.64 LMT का भंडारण कर लिया है, जिसमें से 13.19 LMT किसानों को वितरित की जा चुकी है।
यूरिया और नैनो उर्वरकों पर फोकस
•25 अगस्त तक प्रदेश में कुल 7.02 LMT यूरिया का भंडारण किया गया (3.91 LMT सहकारी क्षेत्र और 3.11 LMT निजी क्षेत्र में)। इसमें से 6.38 LMT पहले ही किसानों को वितरित की जा चुकी है—जो पिछले खरीफ सीजन (2024) में वितरित 6.17 LMT से अधिक है।
•पारंपरिक खाद के साथ-साथ, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। अब तक 2.91 लाख बोतल नैनो यूरिया और 2.38 लाख बोतल नैनो डीएपी का भंडारण किया गया है। इनमें से 2.32 लाख बोतल नैनो यूरिया और 1.85 लाख बोतल नैनो डीएपी किसानों तक पहुँचाई जा चुकी हैं।
अधिकारियों के अनुसार, 2.32 लाख बोतल नैनो यूरिया (500 मि.ली. प्रति बोतल) का प्रभाव 2,617 मीट्रिक टन परंपरागत यूरिया के बराबर है, जबकि 1.85 लाख बोतल नैनो डीएपी का प्रभाव 4,628 मीट्रिक टन पारंपरिक डीएपी के बराबर है।
किसानों और पर्यावरण के लिए फायदे
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि नैनो यूरिया से 80–90% तक पोषक तत्वों का अवशोषण होता है। इससे खाद की बर्बादी रुकती है, खेती की लागत घटती है और प्रदूषण भी कम होता है। पारंपरिक खादों की तुलना में नैनो खाद का भंडारण और परिवहन आसान है और यह पर्यावरण के लिए सुरक्षित है।
उदाहरण के तौर पर, धान की खेती में प्रति एकड़ पारंपरिक रूप से 50 किलो ठोस डीएपी की आवश्यकता होती है। लेकिन नैनो तकनीक के साथ अब केवल 25 किलो ठोस डीएपी और 500 मि.ली. की एक बोतल नैनो डीएपी पर्याप्त है। इससे समान परिणाम कम खर्च और कम पर्यावरणीय प्रभाव के साथ मिलते हैं।
ज़मीनी स्तर पर जागरूकता अभियान
कृषि विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर कृषि चौपाल, फसल बैठकें और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं। विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत समितियों में पंपलेट, पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं। मैदानी कर्मचारी सीधे धान के खेतों में जाकर किसानों को नैनो उर्वरक के प्रयोग और लाभों के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जिससे किसान आत्मविश्वास के साथ इसका उपयोग कर रहे हैं।
नैनो उर्वरकों के बढ़ते उपयोग के साथ छत्तीसगढ़ खाद्य सुरक्षा, किसानों की बचत और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ साधने वाला मॉडल राज्य बनकर उभर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे खाद की मांग-आपूर्ति में संतुलन बनेगा और धान की खेती में स्थायी विकास को बढ़ावा मिलेगा।



