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भारत में लॉन्च हुआ पहला बायोफाउंड्री नेटवर्क, 2030 तक 300 अरब डॉलर बायो-इकोनॉमी का लक्ष्य

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भारत ने बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अपना पहला बायोफाउंड्री नेटवर्क (Biofoundry Network) लॉन्च किया है। इसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) ने संयुक्त रूप से शुरू किया। इस पहल का उद्देश्य देश को 2030 …

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विज्ञान: भूकंप से कैसे सुरक्षित रहता है जापान? जानें क्या है तकनीक

जापान ने हिरोशिमा-नागासाकी के परमाणु हमले से लेकर भूकंप और सुनामी तक का विनाश देखा है। लेकिन अपने कौशल से जापान फिर से मजबूती से खड़ा हुआ। यही नहीं विश्व में विकसित देशों में उसकी गिनती है। भूकंप और सुनामी से निपटने के लिए जापान ने लगातार कार्य किया। खासतौर …

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विज्ञान:बच्चे पैदा करने हजारों किलोमीटर दूर जाते हैं चमगादड़

चमगादड़ धरती के वो जीव हैं जो काफी बड़े हिस्से में फैले हुए हैं। खुशगवार मौसम और पर्याप्त भोजन की तलाश में इनमें से कई हजारों किलोमीटर का सफर तय करते हैं। वैज्ञानिकों को अब तक चमगादड़ों के प्रवास के बारे में कम ही जानकारी थी। एक नई कोशिश के तहत इन चमगादड़ों …

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डायबिटीज के मरीजों के लिए चीनी से कितना बेहतर है एल्यूलोज?

एल्यूलोज एक खास तरह की चीनी है जो बहुत कम मात्रा में पायी जाती है। इसे पहली बार 1940 के दशक में गेहूं के पत्तों में खोजा गया था। हालांकि, इसका इस्तेमाल बहुत कम होता था और इस पर बहुत कम शोध भी हुआ था। वर्ष 1990 के दशक तक …

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दुनिया में पहली बार…IIT मद्रास ने जारी की इंसानी शरीर के इस हिस्से की 3D तस्वीरें

आईआईटी मद्रास ने मंगलवार को मानव भ्रूण के मस्तिष्क की पहली विस्तृत 3डी हाई रिजॉल्यूशन वाली तस्वीरें जारी कीं। संस्थान के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर के शोध में ये तस्वीरें बनाने में कामयाबी मिली। इन तस्वीरों से ब्रेन मैपिंग तकनीक के क्षेत्र में भारत वैश्विक पटल पर उभरा है, क्योंकि …

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कपास में रस चूसने वाले कीटों के प्रबंधन के लिए सीआईसीआर का नया जीवाणु आकर्षक सूत्रीकरण

केन्द्रीय कपास अनुसंधान संस्थान (CICR), नागपुर ने चार पेटेंट तकनीकों के व्यावसायिक उपयोग के लिए अभिव्यक्ति की रुचि शुरू की है। यह पहल संस्थान प्रौद्योगिकी प्रबंधन इकाई (ITMU) और ICAR के एग्रीनोवेट के माध्यम से की जा रही है। वैज्ञानिकों ने कपास में चूसने वाले कीटों जैसे सफेद मक्खियों, एफिड्स और थ्रिप्स के प्रबंधन …

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ज़्यादा तापमान में भी पैदा होने वाले आलू के उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है चीन

सहारनपुर के किसान ने उगाया ‘हवा में पैदा होने वाला आलू’, एक बेल से निकलते हैं 5 से 10 किलो तक आलू

चीन में चौथी मुख्य खाद्य फसल के रूप में, आलू की उपयुक्तता का मूल्यांकन राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुत महत्व रखता है। जलवायु डेटा के आधार पर, इस अध्ययन ने भविष्य में चीन में आलू के जलवायु उपयुक्त क्षेत्र की भविष्यवाणी करने के लिए एक एकीकृत प्रजाति …

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गाय की डकार में मीथेन कम करने की कोशिश में वैज्ञानिक

ग्लोबल वॉर्मिंग के लिए बड़े पैमाने पर जिम्मेदार मीथेन गैस के उत्सर्जन को कम करने के लिए गायों की डकारों में उसकी मात्रा घटाने की कोशिश की जा रही है। अमेरिका के डेविस शहर में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी (यूसी) के एक वैज्ञानिक ने जब दो महीने के बछड़े “थिंग 1” के …

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बीजेपी-कांग्रेस कैसे करेंगी पर्यावरण का संरक्षण?

बीजेपी-कांग्रेस कैसे करेंगी पर्यावरण का संरक्षण?

आदर्श शर्मा भारत के दो सबसे बड़े दलों बीजेपी और कांग्रेस ने पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन को अपने घोषणा-पत्र में सबसे आखिर में जगह दी है। बिहार की आरजेडी ने तो इससे जुड़ा कोई वादा ही नहीं किया। पर्यावरण पर कितना सोचते हैं राजनीतिक दल। भारत में चुनावी सरगर्मी लगातार …

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इफको नैनो यूरिया को खेती के लिए ‘खतरनाक’ क्यों बता रहे वैज्ञानिक !

नैनो यूरिया के एक बोतल में 9.2 ग्राम नाइट्रोजन है, जबकि पौधे की जरूरत 20.7 ग्राम नाइट्रोजन की है। दावों और व्‍यवहार के बीच नाइट्रोजन का जो फर्क है, वह कहां से पूरा होगा, इस पर विस्‍तार से बताने की जरूरत है क्‍योंकि गेहूं दूसरी दलहनी फसलाें की तरह वायुमंडल से नाइट्रोजन नहीं ले पाता है। इससे उत्‍पादन में गिरावट होगी।

इफको नैनो यूरिया नोटिफाइड किया है. कुल जमा इफको नैनाे यूरिया को फर्टिलाइजर उत्पादन क्षेत्र में क्रांतिकारी अविष्‍कार माना जा रहा है. इसके पीछे तर्क और दावे ये हैं कि इफको नैनो यूरिया की 500 एमएल की एक बोतल एक बोरी यूरिया का काम करेगी। कहा जा रहा है कि खाद खपत में …

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