जम्मू–कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में तैनात सैनिकों की सर्दियों की तैयारियों के लिए आवश्यक सामग्री लेकर गई भारतीय सेना की विशेष मालगाड़ी अब 753 टन कश्मीरी सेब लेकर लौटी है। अधिकारियों ने इसे “सैन्य–नागरिक समन्वय” (Military–Civil Fusion) का अनोखा उदाहरण बताया है, जहां सेना की ऑपरेशनल तैयारी और किसानों के आर्थिक अवसर आपस में जुड़े हैं।
यह विशेष मालगाड़ी 12–13 सितंबर को सांबा के पास बीडी बाड़ी से अनंतनाग तक चली। सेना के लिए यह पहली बार था जब सर्दियों की सप्लाई पारंपरिक सड़क मार्ग के बजाय 272 किलोमीटर लंबे उदमपुर–श्रीनगर–बारामूला रेल लिंक (USBRL) से पहुंचाई गई। पहले यह सप्लाई सड़क के रास्ते की जाती थी, जो बर्फबारी और भूस्खलन के कारण अक्सर बाधित हो जाती थी। अब USBRL के जरिए सेना को कश्मीर, कारगिल और लद्दाख तक हर मौसम में सुरक्षित पहुंच मिल रही है।
वापसी यात्रा में, यही रेलगाड़ी कश्मीरी सेब लेकर देश के अन्य हिस्सों के बाजारों के लिए रवाना हुई। सेना के प्रवक्ता ने कहा, “यह केवल लॉजिस्टिक उपलब्धि नहीं है। कश्मीरी सेब की वापसी लोडिंग किसानों के लिए आजीविका मजबूत करने वाला कदम है, जिससे उन्हें बाजारों तक निर्बाध आपूर्ति मिल सकेगी।”
कश्मीर के किसानों ने भी उम्मीद जताई कि इस नए रेल विकल्प से परिवहन लागत घटेगी, खराब होने की संभावना कम होगी और उनकी आमदनी बढ़ेगी।
इसी बीच, एक समानांतर नागरिक पहल के तहत, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को बडगाम से नई दिल्ली के आदर्श नगर तक पहली समर्पित पार्सल ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। आठ पार्सल वैन वाली यह ट्रेन 180 टन की क्षमता रखती है और रोजाना 23–24 टन नाशवां सामान, मुख्य रूप से सेब, उत्तरी बाजारों तक पहुंचाएगी। ट्रेन सुबह 6:15 बजे बडगाम से रवाना होती है, दोपहर में जम्मू के बाड़ी ब्राह्मणा स्टेशन पर रुकती है और अगली सुबह दिल्ली पहुंच जाती है। अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही अनंतनाग से भी ऐसी सेवा शुरू होगी।
डिविजनल रेलवे मैनेजर विवेक कुमार ने इसे “ऐतिहासिक उपलब्धि” बताया, जबकि वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक उचित सिंगल ने कहा कि यह कश्मीर घाटी में माल परिवहन को “क्रांतिकारी” रूप से बदल देगी।
सेना की वापसी ट्रेन और रोजाना चलने वाली पार्सल सेवा, दोनों ही 43,780 करोड़ रुपये की लागत से तैयार USBRL परियोजना की आर्थिक संभावनाओं को उजागर करती हैं। इस लाइन में 36 सुरंगें, 943 पुल और दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज (चिनाब पर) शामिल है।
यह परियोजना जहां सेना को दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में सर्दियों की तैयारी सुनिश्चित करती है, वहीं कश्मीर के किसानों के लिए नए समृद्धि के रास्ते खोलती है, ताकि घाटी का प्रमुख फल – सेब – पहाड़ों के पार बिना किसी बाधा के देशभर के बाजारों तक पहुंच सके।



