कश्मीर में हजारों टन सेब ट्रकों में सड़ रहे हैं। श्रीनगर–जम्मू नेशनल हाईवे पिछले 20 दिनों से बंद होने के कारण बागवानों की मेहनत और आजीविका पर संकट आ गया है। देश में उगने वाले 80 प्रतिशत सेब कश्मीर से आते हैं और लंबे समय से सड़क बंद होने के चलते सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है।
सोशल मीडिया पर ट्रकों में सड़े हुए सेबों को हाईवे किनारे फेंकते हुए किसानों के वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं। यह दृश्य कश्मीर के आम किसानों की हालत बयान कर रहे हैं, जो सालभर मेहनत के बाद अब अपनी फसल को बर्बाद होते देख रहे हैं।
बागवानी पर संकट
कश्मीर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बागवानी है। इस साल खराब मौसम ने पहले ही सेब उत्पादन को नुकसान पहुंचाया था और अब सड़क बंद होने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। कश्मीर के कई मंडियां पिछले दो दिनों से बंद हैं और बागवान सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
सरकार पर निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 20 दिनों से हाईवे बहाल न होने को सरकार की नाकामी बताया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से बात कर इस समस्या के समाधान के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग की है।
भारी तबाही
पिछले महीने हुई भारी बारिश और बादल फटने के कारण श्रीनगर–जम्मू हाईवे को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। उधमपुर के थारेड में लगभग 300 मीटर सड़क बह गई। चेनानी–उधमपुर और नशरी–बनिहाल सेक्शनों में भी भारी नुकसान हुआ।
सेना ने बढ़ाया हाथ
यह हाईवे भारतीय सेना के लिए भी मुख्य सप्लाई लाइन है। आमतौर पर रोजाना इस मार्ग से सैन्य काफिले गुजरते हैं। लंबे समय तक हाईवे बंद रहने के कारण सेना ने रेल मार्ग से अग्रिम सर्दियों की सामग्री भेजी। वापसी में ट्रेन ने कुछ मात्रा में सेब दिल्ली पहुंचाए, लेकिन यह किसानों की भारी फसल के मुकाबले बेहद कम है।
बागवानों की मांग
किसानों ने सरकार की निष्क्रियता पर गुस्सा जताते हुए मांग की है कि अगर सरकार हाईवे बहाल नहीं कर सकती तो इसे सेना को सौंप दे। “हमें अपनी सेना पर भरोसा है। वे कुछ ही घंटों में सड़क बहाल कर देंगे, जैसे उन्होंने हालिया बाढ़ के समय तवी नदी पर बैली ब्रिज बनाकर किया था,” एक गुस्साए किसान ने कहा।
उमर अब्दुल्ला ने भी केंद्र सरकार से कहा कि यदि वे सड़क को संभाल नहीं पा रहे हैं तो इसे जम्मू-कश्मीर सरकार को सौंप दें।



