एग्रो केम फेडरेशन ऑफ इंडिया (ACFI) ने सरकार से एग्रोकेमिकल उद्योग के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम और टैक्स हॉलिडे की मांग की है। संगठन का कहना है कि इससे न केवल घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि तकनीकी उत्पादों के लिए आयात पर निर्भरता भी कम होगी।
एसीएफआई और वैश्विक कंसल्टेंसी फर्म डेलॉइट ने हाल ही में अपने वार्षिक आम बैठक (AGM) में एक नॉलेज पेपर जारी किया। इस रिपोर्ट में फसल सुरक्षा रसायन उद्योग की चुनौतियों और अवसरों का विवरण दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का एग्रोकेमिकल्स निर्यात 2014-15 के 1.3 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 3.3 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। इसके साथ ही भारत, चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एग्रोकेमिकल्स निर्यातक बन गया है।
विलवुड के प्रबंध निदेशक परीक्षित मुंध्रा ने कहा कि उद्योग अब भी कई कच्चे माल और तकनीकी उत्पादों के लिए आयात पर निर्भर है। चीन से आयात होने वाले इनपुट्स पर निर्भरता भारत के लिए एक रणनीतिक जोखिम है, जो भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार प्रतिबंध या फैक्ट्रियों के बंद होने की स्थिति में गंभीर संकट पैदा कर सकता है।
रिपोर्ट ने यह भी बताया कि कई उच्च मूल्य वाले तकनीकी अवयव भारत में पर्याप्त मात्रा में नहीं बनते, क्योंकि उत्पादन लागत अधिक है या तकनीक की कमी है।
कृषि आयुक्त और रजिस्ट्रेशन कमेटी के चेयरमैन, प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि कृषि केवल फसलों के स्वास्थ्य पर ही नहीं बल्कि किसानों के स्वास्थ्य पर भी निर्भर करती है, और जलवायु परिवर्तन इसकी बड़ी चुनौती है।
डेलॉइट इंडिया के पार्टनर-एग्री बिजनेस राजीव रंजन ने कहा कि सरकार को एग्रोकेमिकल सेक्टर के लिए एक PLI स्कीम लानी चाहिए, जो खासतौर पर उन महत्वपूर्ण एक्टिव इंग्रीडिएंट्स और इंटरमीडिएट्स को टारगेट करे जो वर्तमान में बड़े पैमाने पर आयात किए जाते हैं।
नवनिर्वाचित ACFI चेयरमैन राहुल धनुका ने कहा कि ease of doing business बढ़ाना आवश्यक है ताकि कृषि उत्पादन में वृद्धि हो और किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य हासिल किया जा सके।



