भूजल संसाधन अनुमान (GWRE) 2024 रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में 88 ब्लॉकों में पानी की गंभीर समस्या है, जिसका अर्थ है कि भूजल का इस्तेमाल वार्षिक उपलब्धता से अधिक है। इसके अतिरिक्त, 11 ब्लॉकों को गंभीर, आठ को अर्ध-गंभीर और 36 को सुरक्षित के रूप में रखा किया गया है।
हरियाणा विधानसभा में 11 विपक्षी विधायकों द्वारा उठाए गए भूजल क्वालिटी पर एक अल्पकालिक चर्चा के दौरान, रोहतक कांग्रेस विधायक बीबी बत्रा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत में हरियाणा में सबसे ज़्यादा ऐसे जिले हैं जहां बिजली से चलने वाले नलकूप तय सीमा से ज़्यादा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के जिन छह जिलों में सबसे अधिक दिक्कत है वो सिरसा, हिसार, भिवानी, सोनीपत, जींद और गुरुग्राम है।
हरियाणा सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया कि भूजल की क्वालिटी खराब हो रही है। साथ ही अधिक इस्तेमाल और पानी की बर्बादी के कारण जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। हरियाणा सरकार लगातार प्रयास कर रहा है कि कि सूबे में में किसान ऐसी फसलों की खेती करें जिन्हें तैयार होने में कम सिंचाई की जरूरत होती है। सरकार इसके लिए किसानों को कई तरह के लाभ भी दे रही है।
चर्चा का जवाब देते हुए सिंचाई और जल संसाधन विभाग (आई एंड डब्ल्यूआरडी) मंत्री श्रुति चौधरी ने माना कि हरियाणा के भूजल और सीजीडब्ल्यूबी की रिपोर्ट लगातार पानी की क्वालिटी में गिरावट दिखाती है। उन्होंने कहा कि यह गिरावट दशकों से हो रही है। चौधरी ने बताया कि पानी में खारापन और जलभराव इसके कारण है।
हरियाणा में भूजल में कमी के बारे में उन्होंने कहा कि राज्य में भूजल स्तर, विशेष रूप से मीठे पानी वाले क्षेत्र में भारी उपयोग के कारण भूजल स्तर तेजी से घट रहा है, जो एक गंभीर समस्या है।। जून 2014 से जून 2024 तक औसत गिरावट 5.41 मीटर है।



