इस साल मार्च से जून के दौरान अच्छी गुणवत्ता वाली कपास का खेत पर दाम 7,500 से 8,000 रुपये प्रति क्विंटल रहेगा। तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक सर्वे में यह निष्कर्ष निकाला गया है।
सर्वे में कहा गया है कि दुनियाभर में कपास की खपत ऊंची रहने के अनुमान की वजह से भारत से कपास का निर्यात बढ़ा है। इसके अलावा काफी कम शुरुआती स्टॉक की वजह से नवंबर, 2021 से आज की तारीख तक कपास के दाम ऊंचे बने हुए हैं। 

सर्वे में किसानों को सलाह दी गई है कि मौजूदा बाजार स्थिति में दाम और बढ़ने की संभावना के मद्देनजर वे कपास को ‘स्टॉक’ कर रख सकते हैं और मार्च-जून के दौरान उसे बेच सकते हैं।
तमिलनाडु कपास का प्रमुख उपभोक्ता है। 2021-22 के फसल वर्ष में तमिलनाडु में कपास फसल का क्षेत्र 74 हजार हेक्टेयर था। यह पिछले साल से 33 प्रतिशत कम है। राज्य में कपास उत्पादन 1.61 लाख गांठ रहा, जो पिछले साल की तुलना में 35 प्रतिशत कम है।
वैश्विक बाजार में कपास की कीमतें सात साल के उच्चस्तर पर पहुंच गई है। इससे भारतीय कॉटन की कीमतेें जुलाई 2021 में दर्ज किए गए उच्चस्तर के करीब पहुंच गई है। इस हफ्ते कपास की कीमतों में 3 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। वहीं, जुलाई 2021 में इसके दाम 10 फीसदी बढ़े थे। वैश्विक कीमतों में 97 सेंट प्रति कपास की गांठ की तेजी आई है। यह तेजी तब आई है, जब ग्लोबल मार्केट में कॉटन की आपूर्ति में कमजोरी आ गई है। इस साल किसानों के लिए लाभ का सौदा बनी|
इस साल किसानों के लिए कपास की खेती लाभ का सौदा साबित हो रही है। किसानों को कपास के बाजार में अच्छे दाम मिल रहे हैं जो सरकार की ओर से तय किए गए न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊंचे हैं। वहीं दूसरी ओर अंतराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कपास की खूब मांग है। इसे देखते हुए किसानों के लिए इसकी खेती में बहुत संभावनाएं हैं। यदि कपास की वैश्विक मांग बढ़ती है तो इसके भाव और ऊपर जा सकते हैं। इस बात से इंनकार नहीं किया जा सकता है। इसे देखते हुए ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि अगले सीजन में किसान इसकी खेती में दिलचस्पी लेंगे जिससे देश में कपास का रकबा बढ़ सकता है।


भारतीय बाजार में फसल के मजबूत होने की उम्मीद है। वहीं, निर्यात में पिछले साल के मुकाबले 54 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इन सभी वजहों के चलते कपास की कीमतों में इजाफा हो रहा है। बता दें कि भारत कपास व इससे जुड़े उत्पादों का निर्यात करीब 166 देशों को करता है जिससे इसे 100 बिलियन अमेरिकी डालर की आमदनी होती है। हमारे देश से सबसे अधिक कपास की खरीद बांग्लादेश, वियतनाम और पाकिस्तान के द्वारा की जाती है।
वैश्विक कपड़ा बाजार में उपयोग किए जाने वाले सभी प्रकार के रॉ मटेरियल में केवल कपास की हिस्सेदारी ही लगभग 31 प्रतिशत है, जो सब मिला कर 600 अरब डॉलर से अधिक है। भारत विश्व स्तर पर सबसे अधिक कपास उगाने वाला देश है, जिसकी वैल्यू चैन में लगभग 6 करोड़ लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं जिसमें कपास व्यापार और उसके प्रसंस्करण में लगभग 4 से 5 करोड़ लोगों का रोजगार भी शामिल है।
भारतीय कपास का अधिकांश भाग 1 हेक्टेयर से कम के छोटे खेतों में उगाया जाता है। सीआरवीए अध्ययन भारत के तीन प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात और तेलंगाना के 13 जिलों में कपास की खेती और कपास प्रसंस्करण पर केंद्रित है।


भारतीय कपास का अधिकांश भाग 1 हेक्टेयर से कम के छोटे खेतों में उगाया जाता है। सीआरवीए अध्ययन भारत के तीन प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात और तेलंगाना के 13 जिलों में कपास की खेती और कपास प्रसंस्करण पर केंद्रित है। भारत से कपास का निर्यात बांग्लादेश, चीन, वियतनाम, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, श्रीलंका और अन्य देशों को निर्यात किया गया है। क्योंकि इन पडोसी देशों में कपास का उत्पादन कम होता है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा कपास उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। देश में गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु मुख्य कपास उगाने वाले राज्य हैं।
वैश्विक बाजार में मार्च 2021 के दौरान कपास के दाम में आई तेजी के बाद देश में कपास का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से 15 फीसदी बढ़ गया है। सरकार ने कपास का एमएसपी 5,825 रुपए प्रति क्विंटल और मध्यम लंबाई वाले रेशा कपास का एमएसपी 5,515 रुपए प्रति क्विंटल तय किया था। उस समय गुजरात में कपास का भाव 6,500 रुपए प्रति क्विंटल था। इसके बाद कपास के भावों में बढ़ोतरी हुई है।





