विजयवाड़ा: कृषि क्षेत्र में तकनीक को बढ़ावा देने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ने किसानों के उत्पादक संगठन (FPOs) को ड्रोन देने का फैसला किया है। सरकार इन ड्रोन पर 80 प्रतिशत की भारी सब्सिडी देगी। आंध्र प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जो कृषि क्षेत्र में ड्रोन के इस्तेमाल को इस तरह की सब्सिडी के साथ लागू कर रहा है।
राज्य सरकार ने पहले चरण में करीब 900 ड्रोन खरीदने का निर्णय लिया है, जिनका उपयोग आगामी खरीफ सीजन से शुरू किया जाएगा। इन ड्रोन का संचालन चुने गए एफपीओ द्वारा किया जाएगा, जो स्थानीय किसानों की मांग पर कीटनाशक और खाद के छिड़काव में इनका उपयोग करेंगे।
सरकार ने राज्यभर के प्रगतिशील एफपीओ की पहचान कर ली है और चयनित किसानों को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण भी दिया गया है। प्रयोगों के अनुसार, एक एकड़ भूमि में ड्रोन से कीटनाशक या खाद का छिड़काव मात्र सात मिनट में किया जा सकता है। इस गति से एक ड्रोन एक घंटे में लगभग 5 एकड़ और एक दिन में 40-50 एकड़ भूमि को कवर कर सकता है। एफपीओ एक गांव की पूरी कृषि ज़रूरतें लगभग पंद्रह दिनों में पूरी कर सकता है और फिर ड्रोन को जरूरत के हिसाब से अन्य गांवों में भेजा जा सकता है।
प्रति एकड़ छिड़काव का संचालन शुल्क ₹350 तय किया गया है, जबकि किसान अभी तक लगभग ₹1000 प्रति एकड़ मजदूरी पर खर्च कर रहे हैं।
“हम अत्याधुनिक ड्रोन खरीद रहे हैं जिनकी कीमत ₹9.80 लाख है। इसमें से सरकार ₹8 लाख की सब्सिडी देगी, जबकि एफपीओ को शेष ₹1.80 लाख वहन करना होगा,” राज्य के कृषि मंत्री के अच्चनायडु ने बताया।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे इनका उपयोग बढ़ेगा, ड्रोन की कीमत और रखरखाव खर्च भी कम होगा। उन्होंने पिछली वाईएसआरसीपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उस सरकार ने कृषि विभाग के आधुनिकीकरण पर कोई खर्च नहीं किया।
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडु ने बागवानी फसलों के लिए भी सब्सिडी को पुनः शुरू करने का निर्देश दिया है। सरकार अब ड्रिप, पाइप, शेड-नेट और अन्य बागवानी उपकरणों पर 90% तक की सब्सिडी देगी।
मुख्य बिंदु (GFX):
•900 एफपीओ को ड्रोन संचालन की जिम्मेदारी
•ड्रोन 1 एकड़ में कीटनाशक छिड़काव केवल 7 मिनट में करेगा
•मैनुअल तरीके से एक एकड़ में लगते हैं करीब 2 घंटे
•सरकार देगी 80% सब्सिडी, एफपीओ को देना होगा 20% हिस्सा
•बैंकों से एफपीओ को आर्थिक सहायता देने का अनुरोध
•बैंक लोन या CSR फंड के तहत मदद करेंगे
मंत्री ने कहा कि खेती को लाभकारी बनाने का एकमात्र उपाय लागत में कटौती है और नई तकनीकों को अपनाने से यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। सरकार को उम्मीद है कि किसान इस तकनीक को बिना किसी कठिनाई के अपनाएंगे।



